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Aks samastipuri
ye mohabbat agar zaroorat hai
ye mohabbat agar zaroorat hai | ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है
- Aks samastipuri
ये
मोहब्बत
अगर
ज़रूरत
है
ये
ज़रूरत
भी
तो
मोहब्बत
है
मेरा
भी
दिल
नहीं
था
रुकने
का
उस
ने
भी
कह
दिया
इजाज़त
है
शाइ'रों
की
नज़र
से
मत
देखो
दुनिया
दर-अस्ल
ख़ूब-सूरत
है
तुम
मुझे
छोड़
कर
चले
जाओ
मेरी
क़ुर्बत
अगर
मुसीबत
है
लौट
आया
मिरा
अकेला-पन
अब
किसी
की
कहाँ
ज़रूरत
है
'अक्स'
बेहद
नसीब
वाले
हो
तुम
को
मरने
की
भी
सुहूलत
है
- Aks samastipuri
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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उसे
कब
से
यही
समझा
रहा
हूँ
तिरा
ही
था
मैं
जब
तेरा
रहा
हूँ
मुझे
फ़ुर्सत
दबोचे
जा
रही
है
मैं
अपने
आप
से
उक्ता
रहा
हूँ
कोई
भी
रोकने
वाला
नहीं
है
ख़मोशी
से
गुज़रता
जा
रहा
हूँ
मिरी
तिश्ना-लबी
पर
हँसने
वाले
गुज़िश्ता
वक़्त
मैं
दरिया
रहा
हूँ
वो
ग़लती
जो
कभी
की
ही
नहीं
है
उसी
ग़लती
पे
मैं
पछता
रहा
हूँ
मिरी
वीरान
आँखें
कह
रही
हैं
यक़ीनन
मुद्दतों
तन्हा
रहा
हूँ
ज़माना
काम
अपना
कर
रहा
है
मैं
अपना
काम
करता
जा
रहा
हूँ
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धूप
में
जलते
हैं
तब
साया
बनता
है
बड़े
जतन
से
कोई
अपना
बनता
है
सारे
बिखरे
ख़्वाब
इकट्ठा
करने
पर
एक
मुकम्मल
तेरा
चेहरा
बनता
है
घर
के
दोनों
जानिब
दर
लगवाए
हैं
अब
तो
तेरा
दस्तक
देना
बनता
है
प्यार
करो
तो
एक
ख़राबी
ये
भी
है
हद
दर्जे
का
यार
तमाशा
बनता
है
उस
का
पहलू
सिर्फ़
मुयस्सर
है
मुझ
को
या'नी
मेरा
इतना
बनना
बनता
है
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हाए
क्या
बदहवा
से
लम्हा
है
तेरे
होते
हुए
भी
तन्हा
हूँ
Aks samastipuri
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आज़माने
की
क्या
ज़रूरत
है
गर
मुहब्बत
है
तो
मुहब्बत
है
उसका
भी
दिल
नहीं
था
रुकने
का
मैंने
भी
कह
दिया
इजाज़त
है
शाइरों
की
नज़र
से
मत
देखो
दुनिया
दरअस्ल
ख़ूब-सूरत
है
लौट
आया
मेरा
अकेलापन
अब
किसी
की
कहाँ
ज़रूरत
है
"अक्स"
बेहद
नसीब
वाले
हो
तुमको
मरने
की
भी
सहूलत
है
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अम्न
में
हिस्सा
छोड़
चुका
हूँ
एक
परिंदा
छोड़
चुका
हूँ
वक़्त
किसी
का
कब
होता
है
वक़्त
का
रोना
छोड़
चुका
हूँ
मेरे
हिस्से
आता
भी
क्या
अपना
हिस्सा
छोड़
चुका
हूँ
उम्मीदों
के
सीने
पर
अब
सर
को
रखना
छोड़
चुका
हूँ
तुम
सिगरेट
की
बात
करो
हो
मैं
तो
जीना
छोड़
चुका
हूँ
तेरे
हुस्न
पे
ला'नत
है
जा
तेरा
रोना
छोड़
चुका
हूँ
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Aks samastipuri
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