bojh gham ka utha nahin saka | बोझ ग़म का उठा नहीं सकता

  - Akib Javed
बोझग़मकाउठानहींसकता
दर्दअपनाबतानहींसकता
इश्क़कारोगजोलगायाहै
चाहकरभीछिपानहींसकता
ज़िंदगीहैतोग़ममिलेंगेही
हौसलेकोडिगानहींसकता
ख़ूबदौलतकमाईहैग़मकी
मुफ़लिसीकोभुलानहींसकता
जीनामरनामेरायहींयारों
मुल्ककोछोड़जानहींसकता
रातमेंजागजागकेरोया
हाल-ए-दिलकोबतानहींसकता
प्यारअनमोलहैहिफ़ाज़तकर
वर्नाख़ुदकोबचानहींसकता
  - Akib Javed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy