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Aktar ali
aaj ke baad teri chaukhat par
aaj ke baad teri chaukhat par | आज के बाद तेरी चौखट पर
- Aktar ali
आज
के
बाद
तेरी
चौखट
पर
एक
मेरी
कमी
रहेगी
दोस्त
- Aktar ali
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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दोस्ती
लफ्ज़
ही
में
दो
है
दो
सिर्फ़
तेरी
नहीं
चलेगी
दोस्त
Zubair Ali Tabish
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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यूँँ
तो
सर्कस
में
हम
बहुत
ख़ुश
हैं
फिर
भी
जंगल
तो
यार
जंगल
था
Harman Dinesh
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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तिरे
लबों
में
मिरे
यार
ज़ाइक़ा
नहीं
है
हज़ार
बोसे
हैं
उन
पर
प
इक
दु'आ
नहीं
है
Pallav Mishra
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ये
ज़मीं
आसमान
है
कब
तक
तेरा
नाम-ओ-निशान
है
कब
तक
उसकी
जानिब
से
है
तमाशा
सब
वर्ना
ये
इम्तिहान
है
कब
तक
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Aktar ali
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ये
न
पूछो
कि
बस
दिसंबर
में
हूॅं
अकेला
हर
एक
मंज़र
में
Aktar ali
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हमारी
क्या
यही
बस
ज़िंदगी
है
जिधर
देखो
उधर
बस
बेबसी
है
किसे
हम
दास्ताँ
अपनी
सुनाते
यहाँ
हर
एक
को
अपनी
पड़ी
है
किसी
दिन
पूछती
तुम
हाल
मेरा
मुझे
जानाँ
बहुत
तेरी
कमी
है
सही
थे
आप
जो
समझाया
मुझको
मिरे
उस
हाल
पर
शर्मिंदगी
है
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Aktar ali
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जब
गुमाँ
ख़ुद
पे
मुझको
आता
है
अपनी
तस्दीक़
करने
लगता
हूँ
Aktar ali
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जिसे
देखा
है
तुमने
मुस्कुराते
उसी
ने
दिल
चुराया
है
हमारा
Aktar ali
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