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Aktar ali
kiska ye dard jod rakkha hai
kiska ye dard jod rakkha hai | किसका ये दर्द जोड़ रक्खा है
- Aktar ali
किसका
ये
दर्द
जोड़
रक्खा
है
जो
मेरे
दिल
को
तोड़
रक्खा
है
हो
ज़रूरत
तो
याद
कर
लेना
तुम
पे
इक
मोड़
छोड़
रक्खा
है
इस
ज़माने
में
इश्क़
का
मतलब
हुस्न
वालों
ने
होड़
रक्खा
है
इश्क़
के
तुम
भी
मारे
लगते
हो
उसने
भी
मुझको
छोड़
रक्खा
है
- Aktar ali
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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यारो
कुछ
तो
ज़िक्र
करो
तुम
उस
की
क़यामत
बाँहों
का
वो
जो
सिमटते
होंगे
उन
में
वो
तो
मर
जाते
होंगे
Jaun Elia
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गुज़रता
ही
नहीं
वो
एक
लम्हा
इधर
मैं
हूँ
कि
बीता
जा
रहा
हूँ
Madan Mohan Danish
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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दुखे
हुए
लोगों
की
दुखती
रग
को
छूना
ठीक
नहीं
वक़्त
नहीं
पूछा
करते
हैं
यारों
वक़्त
के
मारों
से
Vashu Pandey
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खरे
उतरे
नहीं
अरमाँ
पे
जिनके
कमी
उस
शख़्स
की
अब
खल
रही
है
Aktar ali
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ये
जो
आँखों
में
आब
है
साहब
ख़ुद
का
ये
इंतिख़ाब
है
साहब
रोने
से
मसअले
न
हल
होंगे
देना
पड़ता
जवाब
है
साहब
ग़म
से
दो
चार
रोज़
होते
हैं
अब
यही
दस्तियाब
है
साहब
सब
के
होते
हैं
मसअले
लेकिन
मुझ
पे
जैसे
अज़ाब
है
साहब
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Aktar ali
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ये
ज़मीं
आसमान
है
कब
तक
तेरा
नाम-ओ-निशान
है
कब
तक
उसकी
जानिब
से
है
तमाशा
सब
वर्ना
ये
इम्तिहान
है
कब
तक
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Aktar ali
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आज
के
बाद
तेरी
चौखट
पर
एक
मेरी
कमी
रहेगी
दोस्त
Aktar ali
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वही
हालात
हैं
अब
के
बरस
भी
मगर
कहने
को
अच्छा
दिख
रहा
हूँ
Aktar ali
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