pade the ham bhi jahaan raushni men bikhre hue | पड़े थे हम भी जहाँ रौशनी में बिखरे हुए

  - Akhtar Shumar
पड़ेथेहमभीजहाँरौशनीमेंबिखरेहुए
कईसितारेमिलेउसगलीमेंबिखरेहुए
मिरीकहानीसेपहलेहीजानलेप्यारे
किहादसेहैंमिरीज़िंदगीमेंबिखरेहुए
धनकसीआँखकहेबाँसुरीकीलैमेंमुझे
सितारेढूँडकेलानग़्मगीमेंबिखरेहुए
मैंपुर-सुकूनरहूँझीलकीतरहयानी
किसीख़यालकिसीख़ामुशीमेंबिखरेहुए
वोमुस्कुराकेकोईबातकररहाथा'शुमार'
औरउसकेलफ़्ज़भीथेचाँदनीमेंबिखरेहुए
  - Akhtar Shumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy