jhoom kar badli u | झूम कर बदली उठी और छा गई

  - Akhtar Shirani
झूमकरबदलीउठीऔरछागई
सारीदुनियापरजवानीगई
आहवोउसकीनिगाह-ए-मय-फ़रोश
जबभीउट्ठीमस्तियाँबरसागई
गेसू-ए-मुश्कींमेंवोरू-ए-हसीं
अब्रमेंबिजलीसीइकलहरागई
आलम-ए-मस्तीकीतौबाअल-अमाँ
पारसाईनश्शाबनकरछागई
आहउसकीबे-नियाज़ीकीनज़र
आरज़ूक्याफूलसीकुम्हलागई
साज़-ए-दिलकोगुदगुदायाइश्क़ने
मौतकोलेकरजवानीगई
पारसाईकीजवाँ-मर्गीपूछ
तौबाकरनीथीकिबदलीछागई
'अख़्तर'उसजान-ए-तमन्नाकीअदा
जबकभीयादगईतड़पागई
  - Akhtar Shirani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy