ghuroor-e-pas-e-rivaayat badal ke rakh dooñga | ग़ुरूर-ए-पास-ए-रिवायत बदल के रख दूँगा

  - Akhtar Raza Adeel
ग़ुरूर-ए-पास-ए-रिवायतबदलकेरखदूँगा
मैंरफ़्तगाँकीशरीअ'तबदलकेरखदूँगा
गदा-ए-इल्महूँनिकलातोफिरक़रीनेसे
तुम्हारातर्ज़-ए-तरीक़तबदलकेरखदूँगा
सलाह-ए-दोस्तशराफ़तसेमानलेवर्ना
मैंयेलिबास-ए-शराफ़तबदलकेरखदूँगा
जोअहद-ए-रफ़्तासेजाऊँगारफ़्तगाँकीतरफ़
तोफिरसुकूनसेवहशतबदलकेरखदूँगा
मैंइसज़मीनसेजिसरोज़उठगया'अख़्तर'
तोआसमानकीहालतबदलकेरखदूँगा
  - Akhtar Raza Adeel
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy