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Parwez Akhtar
jo kuchh na ho sakaa fariyaad kar ke rounga
jo kuchh na ho sakaa fariyaad kar ke rounga | जो कुछ न हो सका फ़रियाद कर के रोऊँगा
- Parwez Akhtar
जो
कुछ
न
हो
सका
फ़रियाद
कर
के
रोऊँगा
मैं
अपने
आप
को
आबाद
कर
के
रोऊँगा
सभी
ने
मेरी
ख़लिश
से
है
ज़िंदगी
पाई
तो
आज
ख़ुद
को
मैं
नशाद
कर
के
रोऊँगा
रक़ीब
माँग
रहा
था
ख़ुशी
के
पल
मुझ
से
मैं
आज
उसकी
इमदाद
कर
के
रोऊँगा
शगुफ़्तगी
कभी
मेरे
लिए
बनी
ही
नहीं
तो
आज
कर्ब
को
इजाद
कर
के
रोऊँगा
- Parwez Akhtar
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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तुम्हारे
ख़त
में
नया
इक
सलाम
किसका
था
न
था
रक़ीब
तो
आख़िर
वो
नाम
किसका
था
Dagh Dehlvi
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अब
आ
भी
जाओ
के
सुकूंँ
मिले
मुझे
अगर
जो
जाना
था
तो
क्यूँँंँ
मिले
मुझे
ज़माना
हो
न
हो
रकी़ब
बीच
में
तू
अब
कभी
मिले
तो
यूँंँ
मिले
मुझे
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Faiz Ahmad
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है
दु'आ
जल्दी
जन्नत
अता
हो
तुझे
तू
मेरे
इश्क़
का
इश्क़
है
ऐ
रक़ीब
Prit
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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हाँ
तेरे
हुस्न
को
रुस्वा
किया
है
मैं
तेरे
हुस्न
से
उकता
गया
हूँ
Parwez Akhtar
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एक
बार
बसा
लें
अगर
कुछ
अपने
दिल
में
फिर
दर्द
हो
या
तू
हो
निकलने
नहीं
देंगे
Parwez Akhtar
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अपने
दर्द
पर
उस
को
हंसता
देखना
है
चले
जितने
भी
दिन
अब
ये
तमाशा
देखना
है
कि
उसका
अक्स
अब
आँखों
में
समा
जाए
ऐसे
कि
उसको
आज
मुझे
इतना
ज़ियादा
देखना
है
अब
'अख़्तर'
का
क़त्ल
उसकी
रज़ा
से
होगा
तो
फिर
आज
मुझे
उसका
इरादा
देखना
है
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Parwez Akhtar
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सच
बोलने
दे
ज़ालिम
न
कर
ऐसा
सलूक
मुझ
सेे
मेरे
ख़्वाब
सब
हैं
टूटे
कहीं
दिल
टूट
न
जाए
Parwez Akhtar
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अब
'अख़्तर'
तुम्हें
कैसे
मनाएं
तुम
हर
बात
पर
ही
बिगड़
रही
हो
अच्छा!
तो
तुम
को
भी
इश्क़
है
मुझ
से
देखो
तुम
सच
मुच
मुझ
से
झगड़
रही
हो
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Parwez Akhtar
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