musalsal chala raahguzaar men raha | मुसलसल चला रहगुज़र में रहा

  - Akhtar Jameel Nazmi
मुसलसलचलारहगुज़रमेंरहा
मिराआब-ओ-दानासफ़रमेंरहा
मैंअपनीघुटनअपनेदिलमेंलिए
हमेशाहवा-दारघरमेंरहा
नज़रसेकईलोगगुज़रेमगर
वहीएकचेहरानज़रमेंरहा
मुझेभीख़ुशीढूँडनेआईथी
मगरउनदिनोंमैंसफ़रमेंरहा
किसीपरतवज्जोहकिसीनेदी
मिराऐबसबकीनज़रमेंरहा
मुझेख़ुदभीहैरतहैइसबातपर
सुकूँसेबहुतशोर-ओ-शरमेंरहा
गुज़ारीहै'नज़मी'अजबज़िंदगी
मैंबाहररहाहूँघरमेंरहा
  - Akhtar Jameel Nazmi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy