mohabbat ko hamesha se shareek-e-kaar dekha hai | मोहब्बत को हमेशा से शरीक-ए-कार देखा है

  - Akhtar Imam Anjum
मोहब्बतकोहमेशासेशरीक-ए-कारदेखाहै
अदावतसेहरइकरिश्तायहाँदुश्वारदेखाहै
यहाँआपसमेंहम-आहंगहोनाहैबहुतमुश्किल
कभीमुफ़्लिसभीदेखाहैकभीज़रदारदेखाहै
उछालीजारहीहैंपगड़ियाँइल्ज़ामहैसरपर
नहींगर्दनपेसरजिसकेवहीसरदारदेखाहै
मसाइलदूसरोंकेहलजोकरतेहैंहक़ीक़तहै
उन्हींकेघरमेंउठतेबीचमेंदीवारदेखाहै
अजबहैहालअबकिसपरभरोसाहमकरें'अंजुम'
यहाँपरलूटनेवालोंकोपहरे-दारदेखाहै
  - Akhtar Imam Anjum
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy