zindagi se paas lekin husn ke qisse se door | ज़िंदगी से पास लेकिन हुस्न के क़िस्से से दूर

  - Akhtar Hashmi
ज़िंदगीसेपासलेकिनहुस्नकेक़िस्सेसेदूर
हमग़ज़लरखतेहैंअपनीज़ुल्फ़केसाएसेदूर
हमसेजिनकोउन्सियतहैवोखिंचेजाएँगे
उनकोक्यानज़दीकलाएँजोहैंख़ुदपहलेसेदूर
जानेकैसेकर्बउभरेमेरेचेहरेपरकिजो
वोनिगाहेंअपनीरखतेहैंमिरेचेहरेसेदूर
एकलम्हाप्यारकाजिसकोमिलेवोसुर्ख़-रू
क्यूँँमुझेरक्खागयाफिरइकइसीलम्हेसेदूर
ज़ब्तकरनाकितनामुश्किलथामुझेमालूमहै
ज़िंदगीकोफिरभीरक्खामैंनेहरफ़ित्नेसेदूर
ज़ुल्मकरकेतूअदालतसेअगरबचभीगया
सोचभागेगाकहाँतकआसमाँवालेसेदूर
आख़िरशअश्कोंकेचलतेहीदु'आपूरीहुई
तुमनेअख़्तरजिनकोरक्खाआजतकअपनेसेदूर
  - Akhtar Hashmi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy