haal-e-dil sunaane men umr beet jaati hai | हाल-ए-दिल सुनाने में उम्र बीत जाती है

  - Akhtar Azad
हाल-ए-दिलसुनानेमेंउम्रबीतजातीहै
दिलमेंघरबनानेमेंउम्रबीतजातीहै
यूँँतोरोज़कहतेहैंउनकोभूलजाएँगे
हाँमगरभुलानेमेंउम्रबीतजातीहै
यूँँतोमुस्कुरानेकोरोज़मुस्कुरातेहैं
खुलकेमुस्कुरानेमेंउम्रबीतजातीहै
ज़िंदगीहमेशाजबतीरगीकीज़दमेंहो
शम्अ'इकजलानेमेंउम्रबीतजातीहै
शौक़-ए-जुस्तुजूमेंहमला-मकाँसेगुज़रेहैं
ख़ुदकोआज़मानेमेंउम्रबीतजातीहै
इसलिएनहींकरतेउनसेकोईवा'दाहम
वा'देकेनिभानेमेंउम्रबीतजातीहै
मौतज़िंदगीमेंकुछफ़ासलानहींलेकिन
फिरभीआनेजानेमेंउम्रबीतजातीहै
तिनकातिनकाजोड़ाहैहमनेरात-दिन'अख़्तर'
आशियाँसजानेमेंउम्रबीतजातीहै
  - Akhtar Azad
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