jaan-sipaari ke bhi armaan zindagi ki aas bhi | जाँ-सिपारी के भी अरमाँ ज़िंदगी की आस भी

  - Akhtar Ansari
जाँ-सिपारीकेभीअरमाँज़िंदगीकीआसभी
हिफ़्ज़-ए-नामूस-ए-अलमभीनीश-ए-ग़मकापासभी
ख़ाकदर-बरहीसहीमैंख़ाकभीवोख़ाकहै
जिसमेंमेरेज़ख़्म-ए-दिलकीबूभीहैऔरबासभी
कितनेदौर-ए-चर्ख़उनआँखोंनेदेखेकुछपूछ
मिटचुकाहैवक़्तकीरफ़्तारकाएहसासभी
हाएवोइकनश्तर-आगींनेश्तर-अफ़रोज़याद
जिसकेआगेहेचअपनीबुर्रिश-ए-इंफ़ासभी
हमथेकुछख़ुदहीउससौदेपेराज़ीवर्नायूँँ
रासआनेकोयेदुनियाहीजातीरासभी
ख़ुदकोदिलयास-ए-कामिलकेहवालेयूँँकर
झाँकतीहैज़ेहनकेग़ुर्फ़ेसेकोईआसभी
कौनउसवादीसेउछलाता-सर-ए-अर्श-ए-बरीं
गुमहैंजिसवादीमें'अख़्तर'ख़िज़्रभीइल्यासभी
  - Akhtar Ansari
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