thak ke aaKHir shaay'ri karne padi | थक के आख़िर शाइ'री करनी पड़ी

  - Akhgar shahani
थककेआख़िरशाइ'रीकरनीपड़ी
रहबरोंकीरहबरीकरनीपड़ी
हज़रत-ए-आदमकीसादाभूलसे
ता-क़यामतबंदगीकरनीपड़ी
दोस्तोंकीदोस्तीकोदेखकर
दुश्मनोंसेदोस्तीकरनीपड़ी
देदियाहैचाँदसूरजनेजवाब
दिल-जलोंकोरौशनीकरनीपड़ी
जबकिसीनेभीकुछसमझाहमें
यारकोपैग़म्बरीकरनीपड़ी
  - Akhgar shahani
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