ubhar rahi hai kiran subh-e-zoo-fishaan ke li.e | उभर रही है किरन सुब्ह-ए-ज़ू-फ़िशाँ के लिए

  - Akhgar Panipati
उभररहीहैकिरनसुब्ह-ए-ज़ू-फ़िशाँकेलिए
सँवररहीहैफ़ज़ाहुस्न-ए-गुलिस्ताँकेलिए
मिरीफ़सुर्दाउम्मीदोंकोकरदियाख़ंदाँ
येइल्तिफ़ात-ए-नज़रइकशिकस्ताजाँकेलिए
ख़ुदाकेदरपेतोसज्दा-कुनाँहैइकदुनिया
मिरीजबींहैफ़क़ततेरेआस्ताँकेलिए
तिरेहुज़ूरमेंआयातोखोगयाऐसा
ज़बानखुलसकीअर्ज़-ए-दास्ताँकेलिए
उन्हेंशिकस्त-ए-मोहब्बतकाख़ौफ़क्या'अख़्गर'
कफ़न-बदोशजोनिकलेहैंइम्तिहाँकेलिए
  - Akhgar Panipati
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy