juzw-o-kal ka ham is andaaz se rishta samjhe | जुज़्व-ओ-कल का हम इस अंदाज़ से रिश्ता समझे

  - Akbar Haideri Kashmiri
जुज़्व-ओ-कलकाहमइसअंदाज़सेरिश्तासमझे
देखकरक़तरेकोमाहिय्यत-ए-दरियासमझे
हरअदातेरीहम-आहंगथीदिलसेइतनी
हरअदाकोतिरीहमदिलकातक़ाज़ासमझे
हमवोख़ुद-बींहैंकिहंगामा-ए-दिलकेआगे
सारेहंगामा-ए-गीतीकोतमाशासमझे
हमकोमिट्टीकेघरोंदोंकीहक़ीक़तमा'लूम
जिस्मकीख़ाककोहमनफ़्सकासायासमझे
हमकिहरनिस्बत-ए-मौहूमकोअपनातेरहे
इकशिकस्तासेतअ'ल्लुक़कोभीकितनासमझे
उस्तुवारइतनाहुआरिश्ता-ए-आवाज़'अकबर'
दिलकीधड़कनकोभीहमदोस्तकालहजासमझे
  - Akbar Haideri Kashmiri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy