ishq-e-but men kufr ka mujh ko adab karna pada | इश्क़-ए-बुत में कुफ़्र का मुझ को अदब करना पड़ा

  - Akbar Allahabadi
इश्क़-ए-बुतमेंकुफ़्रकामुझकोअदबकरनापड़ा
जोबरहमननेकहाआख़िरवोसबकरनापड़ा
सब्रकरनाफ़ुर्क़त-ए-महबूबमेंसमझेथेसहल
खुलगयाअपनीसमझकाहालजबकरनापड़ा
तजरबेनेहुब्ब-ए-दुनियासेसिखायाएहतिराज़
पहलेकहतेथेफ़क़तमुँहसेऔरअबकरनापड़ा
शैख़कीमज्लिसमेंभीमुफ़्लिसकीकुछपुर्सिशनहीं
दीनकीख़ातिरसेदुनियाकोतलबकरनापड़ा
क्याकहूँबे-ख़ुदहुआमैंकिसनिगाह-ए-मस्तसे
अक़्लकोभीमेरीहस्तीकाअदबकरनापड़ा
इक़तिज़ाफ़ितरतकारुकताहैकहींहम-नशीं
शैख़-साहिबकोभीआख़िरकार-ए-शबकरनापड़ा
आलम-ए-हस्तीकोथामद्द-ए-नज़रकत्मान-ए-राज़
एकशयकोदूसरीशयकासबबकरनापड़ा
शे'रग़ैरोंकेउसेमुतलक़नहींआएपसंद
हज़रत-ए-'अकबर'कोबिल-आख़िरतलबकरनापड़ा
  - Akbar Allahabadi
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