waqt-e-safar qareeb hai bistar samet luun | वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

  - Ajmal Ajmali
वक़्त-ए-सफ़रक़रीबहैबिस्तरसमेटलूँ
बिखराहुआहयातकादफ़्तरसमेटलूँ
फिरजानेहममिलेंमिलेंइकज़रारुको
मैंदिलकेआईनेमेंयेमंज़रसमेटलूँ
यारोंनेजोसुलूककियाउसकाक्यागिला
फेंकेहैंदोस्तोंनेजोपत्थरसमेटलूँ
कलजानेकैसेहोंगेकहाँहोंगेघरकेलोग
आँखोंमेंएकबारभराघरसमेटलूँ
तार-ए-नज़रभीग़मकीतमाज़तसेख़ुश्कहै
वोप्यासहैमिलेतोसमुंदरसमेटलूँ
'अजमल'भड़करहीहैज़मानेमेंजितनीआग
जीचाहताहैसीनेकेअंदरसमेटलूँ
  - Ajmal Ajmali
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