har ujaala nayi sehar to nahin | हर उजाला नई सहर तो नहीं

  - Ajmal Ajmali
हरउजालानईसहरतोनहीं
रातकीउम्ररात-भरतोनहीं
आदमीचंदगामबढ़सके
ज़िंदगीइतनीमुख़्तसरतोनहीं
इकउजालासासाथरहताहै
सोचताहूँतिरीनज़रतोनहीं
एकहंगामहैबयाबाँमें
कोईआमादा-ए-सफ़रतोनहीं
वक़्तबे-शकअज़ीमहैलेकिन
मुझसेतुझसेअज़ीम-तरतोनहीं
दूरकुछसाएसेहैंसहरामें
राह-ए-गुम-कर्दाहम-सफ़रतोनहीं
आपजोभीकहेंवोसच'अजमल'
आपअबइतनेमो'तबरतोनहीं
  - Ajmal Ajmali
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