ik yaad so rahe ko uthaati hai aaj bhi | इक याद सो रहे को उठाती है आज भी

  - Ajeet Singh Hasrat
इकयादसोरहेकोउठातीहैआजभी
ख़ुदजागतीहैमुझकोजगातीहैआजभी
येकैसीमुतरिबाहैजोछुपकरजहानसे
धी
मेंसुरोंमेंरातकोगातीहैआजभी
सदियाँगुज़रगईंजिसेडूबेहुएयहाँ
उसकोसदा-ए-शौक़बुलातीहैआजभी
जिसशहर-ए-आरज़ूकेनिशानातमिटगए
दिलकीनिगाहफिरवहींजातीहैआजभी
होंटोंपेबारबारज़बाँफेरताथाजो
उसक़ाफ़िलेकीप्यासरुलातीहैआजभी
पर्बतकीचोटियोंपेवोरोतीहुईघटा
किसहादसेपेनीरबहातीहैआजभी
बसएकहीबलाहैमोहब्बतकहेंजिसे
वोपानियोंमेंआगलगातीहैआजभी
हररोज़केख़्वाबमेंपाज़ेबकीसदा
धड़कनहमारेदिलकीबढ़ातीहैआजभी
'हसरत'कोईतोखोगयाउम्र-ए-अज़ीज़का
जोनंगेपाँवदौड़तीजातीहैआजभी
  - Ajeet Singh Hasrat
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