kisi ke hijr ko aise manaa rahe the ham | किसी के हिज्र को ऐसे मना रहे थे हम

  - Aisha Ayyub
किसीकेहिज्रकोऐसेमनारहेथेहम
घड़ीमेंवक़्तकोउल्टाघुमारहेथेहम
नहींथायादसबक़अपनीज़िंदगीकाहमें
सोइम्तिहानकापरचाबनारहेथेहम
किनारेबैठकेआँसूबहाकेआएथे
नदीकीप्यासकोपानीपिलारहेथेहम
कियायेजुर्मकिअपनेहीदिलकीसुनतेथे
यहीकहेंकिख़ुदअपनीसज़ारहेथेहम
हमउसकेज़ुल्मकेबढ़नेकेइंतिज़ारमेंथे
तभीतोज़ब्तकीक़ुव्वतबढ़ारहेथेहम
लगाकेएकठहाकाउसीकेज़ेर-ए-असर
बसअपनेज़ख़्मकोनीचादिखारहेथेहम
ख़ुदअपनेआपकोशानोंपेलेकेचलतेथे
ख़ुदअपनेआपकामातममनारहेथेहम
  - Aisha Ayyub
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