bazm khaali nahin mehmaan nikal aate hain | बज़्म ख़ाली नहीं मेहमान निकल आते हैं

  - Ain Tabish
बज़्मख़ालीनहींमेहमाननिकलआतेहैं
कुछतोअफ़्सानेमिरीजाननिकलआतेहैं
रोज़इकमर्गकाआलमभीगुज़रताहैयहाँ
रोज़जीनेकेभीसामाननिकलआतेहैं
सोचताहूँपर-ए-परवाज़समेटूँलेकिन
कितनेभूलेहुएपैमाननिकलआतेहैं
यादकेसोएहुएक़ाफ़िलेजागउठतेहैं
ख़्वाबकेकुछनएउनवाननिकलआतेहैं
बैठनाचाहतीहैथककेजोवहशतअपनी
कितनेहीदश्त-ओ-बयाबाननिकलआतेहैं
इस्तिआरेहैंजोआँखोंसेछलकपड़तेहैं
कितनेहीअश्ककेदीवाननिकलआतेहैं
इकज़राचैनभीलेतेनहीं'ताबिश'-साहब
मुल्क-ए-ग़मसेनएफ़रमाननिकलआतेहैं
  - Ain Tabish
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