ik tasalsul se ek aziyyat ko jaanib-e-dil uchaalta hai koi | इक तसलसुल से एक अज़िय्यत को जानिब-ए-दिल उछालता है कोई

  - Aila Tahir
इकतसलसुलसेएकअज़िय्यतकोजानिब-ए-दिलउछालताहैकोई
एकमुश्किलसेनीम-जाँहोकरख़ुदकोकैसेसँभालताहैकोई
बुझतीपलकोंसेताकतीवहशतशुक्रकरहमतुझेमुयस्सरहैं
हमेंजोरोगहोगएलाहिक़देखवोभीउजालताहैकोई
इम्तिहाँमेंपड़ेहुएयेलोगइकतअस्सुफ़सेदेखताहैजहाँ
हाएऐसेख़राबहालोंकेकहाँशजरेखँगालताहैकोई
गर्द-ए-राह-ए-सफ़रहीहैंहमलोगऐन-मुमकिनहैभूलजाओहमें
जिसतरहघरकाफ़ालतूसामाँबे-दिलीसेनिकालताहैकोई
बा'दमेरेभीकितनेलोगआएतुमकोअच्छेलगेतुम्हारेहुए
क्याकभीचुपकीसाअ'तोंमेंतुम्हेंमिरीतरहसँभालताहैकोई
  - Aila Tahir
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