dhuaan uth raha hai jo baahar miyaan | धुआँ उठ रहा है जो बाहर मियाँ

  - Ahsan Rizwi
धुआँउठरहाहैजोबाहरमियाँ
सुलगताहैकुछअपनेअंदरमियाँ
मैंख़ुदतोभटकनेकाक़ाइलनहीं
घुमाताफिरेहैमुक़द्दरमियाँ
गुमाँबैठेबैठेयेअक्सरहुआ
गयाहैअभीकोईउठकरमियाँ
येमानाकिदीवार-ओ-दरहैंवही
मगरअबयेलगतानहींघरमियाँ
मिरेरुख़पेतहरीरक्याकुछनहीं
कभीकोईदेखेतोपढ़करमियाँ
कभीख़ुदकोधरतीसेभीजोड़िए
उड़ेंगेकहाँतकफ़लकपरमियाँ
बसइकरस्मथीजोनिभातेरहे
हुईकबख़ुशीउससेमिलकरमियाँ
  - Ahsan Rizwi
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