tamaam shahar hai apna magar akela hooñ | तमाम शहर है अपना मगर अकेला हूँ

  - Ahsan Aazmi
तमामशहरहैअपनामगरअकेलाहूँ
हैमेरेसाथज़मानामगरअकेलाहूँ
अजीबकैफ़ियत-ए-बे-क़रारी-ए-दिलहै
हुजूम-ए-ग़मकाहैनर्ग़ामगरअकेलाहूँ
तुम्हारेआनेसेहीदूरहोगीतन्हाई
हैतेरीयादोंनेघेरामगरअकेलाहूँ
चलाहूँशहर-ए-सितममेंपयाम-ए-अम्नलिए
बुलंदहैमिराजज़्बामगरअकेलाहूँ
तूसाथदेतोमैंछूलूँबुलंदी-ए-अफ़्लाक
मिराभीअज़्महैऊँचामगरअकेलाहूँ
कुछऔरप्यारकेझरनेबहेंतोबातबने
मैंहूँख़ुलूसकाचश्मामगरअकेलाहूँ
जानेकैसीहैक़िस्मतमुझएकक़तरेकी
हुआहूँशामिल-ए-दरियामगरअकेलाहूँ
रह-ए-वफ़ामेंकोईहम-सफ़रनहींमेरा
मैंकारवाँकाहूँहिस्सामगरअकेलाहूँ
कियातर्कजहाँकोहुआसहरा-नवर्द
बनाहैलोगोंसेरिश्तामगरअकेलाहूँ
जानेखोगईअपनाइयतकहाँ'अहसन'
लगाहैअपनोंकामेलामगरअकेलाहूँ
  - Ahsan Aazmi
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