nafrat ke andheron ko mita kyuuñ nahin dete | नफ़रत के अँधेरों को मिटा क्यूँ नहीं देते

  - Ahsan Aazmi
नफ़रतकेअँधेरोंकोमिटाक्यूँनहींदेते
लौशम-ए-मोहब्बतकीबढ़ाक्यूँनहींदेते
चाहतहैअगरअम्नकीअम्नकेख़ूगर
दीवारतअ'स्सुबकीगिराक्यूँनहींदेते
क्यूँकरतेहोख़ूँअद्लकामंसबकीइहानत
मुंसिफ़होतोमुजरिमकोसज़ाक्यूँनहींदेते
रहबरोतुमजैसेहोगुफ़्तारमेंयकता
किरदारकासिक्काभीबिठाक्यूँनहींदेते
तारिक़सीफ़ुतूहातकाअरमानअगरहै
साहिलपेसफ़ीनेकोजलाक्यूँनहींदेते
बनतेहोजोतुमउस्वा-ए-अस्लाफ़केपैरव
दुश्नाम-तराज़ोंकोदु'आक्यूँनहींदेते
सफ़मेंजोअदूसूरत-ए-अहबाबहैंउनके
चेहरोंसेहिजाबातउठाक्यूँनहींदेते
क्यूँजातेहोतुममुझकोलगातेहुएठोकर
पत्थरहूँतोरस्तेसेहटाक्यूँनहींदेते
'अहसन'तुम्हेंपानाहैजोमेराज-ए-बुलंदी
सररबकेहुज़ूरअपनाझुकाक्यूँनहींदेते
  - Ahsan Aazmi
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