gham ka pahaad mom ke jaise pighal gaya | ग़म का पहाड़ मोम के जैसे पिघल गया

  - Ahmed Nisar
ग़मकापहाड़मोमकेजैसेपिघलगया
इकआगलेकेअश्कोंकीसूरतनिकलगया
ख़ुश-फ़हमियोंकोसोचकेमैंभीमचलगया
जैसेखिलौनादेखकेबच्चाबहलगया
कलतकतोखेलताथावोशो'लोंसेआगसे
नाजानेआजकैसेवोपानीसेजलगया
झुलसेबदनकोदेखकेकतरारहाहैवो
जिसकेमैंघरकीआगबुझानेमेंजलगया
बारिशहुईग़मोंकीतोआँखोंकीसीपमें
आँसूकाक़तरापलकोंसेगिरतेसँभलगया
वैसेसभीतोज़ीस्तसेदामनबचालिए
वोकौनहैजोमौतसेबचकरनिकलगया
तक़दीरसोजाएकहींजागिएज़रा
देखोतरक़्क़ियोंकाभीसूरजनिकलगया
गरहोसकेतोआपभीबदलोमियाँ'निसार'
कहनापड़ेयेकिज़मानाबदलगया
  - Ahmed Nisar
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