hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Faiz Ahmad
main hi kambakht hooñ zinda hooñ bichhad ke varna
main hi kambakht hooñ zinda hooñ bichhad ke varna | मैं ही कमबख़्त हूँ ज़िंदा हूँ बिछड़ के, वरना
- Faiz Ahmad
मैं
ही
कमबख़्त
हूँ
ज़िंदा
हूँ
बिछड़
के,
वरना
मैने
देखा
है
हर
इक
चीज़
को
तन्हा
कर
के
- Faiz Ahmad
Download Sher Image
मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
24 Likes
ये
जो
हिजरत
के
मारे
हुए
हैं
यहाँ
अगले
मिसरे
पे
रो
के
कहेंगे
कि
हाँ
Ali Zaryoun
Send
Download Image
63 Likes
या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
Read Full
Kushal Dauneria
Send
Download Image
64 Likes
पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
Send
Download Image
70 Likes
तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
Send
Download Image
34 Likes
जाड़ों
की
रातें
उस
पर
भी
तुम
सेे
ये
जुदाई
बाहों
की
छोड़ो
हमको
हासिल
नहीं
रजाई
Harsh saxena
Send
Download Image
4 Likes
मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
70 Likes
काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
10 Likes
इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
Read Full
Idris Babar
Send
Download Image
20 Likes
मैं
न
सोया
रात
सारी
तुम
कहो
बिन
मेरे
कैसे
गुज़ारी,
तुम
कहो
हिज्र,
आँसू,
दर्द,
आहें,
शा'इरी
ये
तो
बातें
थीं
हमारी,
तुम
कहो
Read Full
Prakhar Kanha
Send
Download Image
53 Likes
Read More
कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
Read Full
Faiz Ahmad
Send
Download Image
7 Likes
कि
दिल
करता
है
ख़ुद
को
आइने
से
खींच
लूंँ
बाहर
कोई
तो
होगा
जिस
सेे
फिर
लिपट
के
रो
सकूंँगा
मैं
Faiz Ahmad
Send
Download Image
3 Likes
तिरे
बिन
ज़िन्दगी
मेरी
थमी
सी
है
तिरे
बिन
इक
मिरे
अंदर
कमी
सी
है
तिरी
यादों
ने
दस्तक
दी
फिर
इस
दिल
पर
मिरी
आँखों
में
फिर
आई
नमी
सी
है
तिरे
बिन
अब
यहाँ
गुल
खिल
रहें
तो
हैं
मगर
इन
में
महक
की
कुछ
कमी
सी
है
मिरे
संग
अब
नहीं
है
वो
मगर
अहमद
लगेगी
ज़िन्दगी
भर
इक
कमी
सी
है
Read Full
Faiz Ahmad
Download Image
1 Like
मैं
अपने
आप
को
भी
हम
नहीं
बुलाता
अब
मिरा
मुझ
ही
में
होना
भी
मुझे
गवारा
नहीं
Faiz Ahmad
Send
Download Image
1 Like
आपकी
आँखों
की
जो
कर
ले
ज़ियारत
इक
बार
उसका
दिल
फिर
तो
कहीं
और
न
माथा
टेके
Faiz Ahmad
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Haar Shayari
Aam Shayari
Shaheed Shayari
Inquilab Shayari
Anjam Shayari