ajab nahin ki zameen paanv se sarak jaa.e | अजब नहीं कि ज़मीं पाँव से सरक जाए

  - Ahmad Waqas Mahrwi
अजबनहींकिज़मींपाँवसेसरकजाए
हमारेसरपेकईदिनसेआसमाँभीनहीं
शरीफ़रहकेगुज़ारीगईजवानीका
अगरचेफ़ाएदाकमहैमगरज़ियाँभीनहीं
उसेक़रीबसेदेखेहुएज़मानाहुआ
सुनाहैदेखनेवालोंसेअबजवाँभीनहीं
मैंकोईदेरकोआयाहूँइसख़राबेमें
मिरीनशिस्तनहींहैमिरामकाँभीनहीं
'वक़ास'लेकेकहाँजाएअपनीग़ुर्बतको
किइसलिएतोकोईदूसराजहाँभीनहीं
  - Ahmad Waqas Mahrwi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy