miraa dukh bhi kabhi sunega kya | मेरा दुख भी कभी सुनेगा क्या

  - Ahmad Soz
मेरादुखभीकभीसुनेगाक्या
बातमुझसेभीवोकरेगाक्या
आजकादिनमुझेक़यामतहै
औरयेदिनकभीढलेगाक्या
होचुकाहूँमैंजलकेराखयहाँ
राखकाढेरफिरजलेगाक्या
अबभीउँगलीपकड़केवोमेरी
सोचतारहताहूँचलेगाक्या
सामनेमेरेकलजोबैठाथा
वोदोबाराकभीमिलेगाक्या
मुद्दतोंसेहैक़ैदपिंजरेमें
अबउड़ादूँतोवोउड़ेगाक्या
इसतरफ़'सोज़'हैमिरासबकुछ
उसतरफ़दिलमिरालगेगाक्या
  - Ahmad Soz
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