main fath-e-zaat manzar tak na pahuncha | मैं फ़तह-ए-ज़ात मंज़र तक न पहुँचा

  - Ahmad Shanas
मैंफ़तह-ए-ज़ातमंज़रतकपहुँचा
मिरातेशामिरेसरतकपहुँचा
उसेमेमारलिक्खाबस्तियोंने
किजोपहलेहीपत्थरतकपहुँचा
तिजारतदिलकीधड़कनगिनरहीहै
त'अल्लुक़लुत्फ़-ए-मंज़रतकपहुँचा
शगुफ़्तागालतीखेख़तकामौसम
दोबारानख़्ल-ए-पैकरतकपहुँचा
बहुतछोटासफ़रथाज़िंदगीका
मैंअपनेघरकेअंदरतकपहुँचा
येकैसाप्यासकामौसमहै'अहमद'
समुंदरदीदा-ए-तरतकपहुँचा
  - Ahmad Shanas
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