har lamha agar gurez-paa hai | हर लम्हा अगर गुरेज़-पा है

  - Ahmad Nadeem Qasmi
हरलम्हाअगरगुरेज़-पाहै
तूक्यूँँमिरेदिलमेंबसगयाहै
चिलमनमेंगुलाबसँभलरहाहै
येतूहैकिशोख़ी-ए-सबाहै
झुकतीनज़रेंबतारहीहैं
मेरेलिएतूभीसोचताहै
मैंतेरेकहेसेचुपहूँलेकिन
चुपभीतूबयान-ए-मुद्दआहै
हरदेसकीअपनीअपनीबोली
सहराकासुकूतभीसदाहै
इकउम्रकेबअ'दमुस्कुराकर
तूनेतोमुझेरुलादियाहै
उसवक़्तकाहिसाबक्यादूँ
जोतेरेबग़ैरकटगयाहै
माज़ीकीसुनाऊँक्याकहानी
लम्हालम्हागुज़रगयाहै
मतमाँगदुआएँजबमोहब्बत
तेरामेरामुआमलाहै
अबतुझसेजोरब्तहैतोइतना
तेराहीख़ुदामिराख़ुदाहै
रोनेकोअबअश्कभीनहींहैं
याइश्क़कोसब्रगयाहै
अबकिसकीतलाशमेंहैंझोंके
मैंनेतोदियाबुझादियाहै
कुछखेलनहींहैइश्क़करना
येज़िंदगीभरकारत-जगाहै
  - Ahmad Nadeem Qasmi
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