gul tira rang chura laaye hain gulzaaron men | गुल तिरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में

  - Ahmad Nadeem Qasmi
गुलतिरारंगचुरालाएहैंगुलज़ारोंमें
जलरहाहूँभरीबरसातकीबौछारोंमें
मुझसेकतराकेनिकलजामगरजान-ए-हया
दिलकीलौदेखरहाहूँतिरेरुख़्सारोंमें
हुस्न-ए-बेगाना-ए-एहसास-ए-जमालअच्छाहै
ग़ुंचेखिलतेहैंतोबिकजातेहैंबाज़ारोंमें
ज़िक्रकरतेहैंतिरामुझसेब-उन्वान-ए-जफ़ा
चारा-गरपरपिरोलाएहैंतलवारोंमें
ज़ख़्मछुपसकतेहैंलेकिनमुझेफ़नकीसौगंद
ग़मकीदौलतभीहैशामिलमिरेशहकारोंमें
मुंतज़िरहैंकिकोईतेशा-ए-तख़लीक़उठाए
कितनेअसनामअभीदफ़नहैंकोहसारोंमें
मुझकोनफ़रतसेनहींप्यारसेमस्लूबकरो
मैंतोशामिलहूँमोहब्बतकेगुनहगारोंमें
  - Ahmad Nadeem Qasmi
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