kahaan ki goonj dil-e-na-tawan men rahtii hai | कहाँ की गूँज दिल-ए-ना-तवाँ में रहती है

  - Ahmad Mushtaq
कहाँकीगूँजदिल-ए-ना-तवाँमेंरहतीहै
किथरथरीसीअजबजिस्म-ओ-जाँमेंरहतीहै
क़दमक़दमपेवहीचश्मलबवहीगेसू
तमामउम्रनज़रइम्तिहाँमेंरहतीहै
मज़ातोयेहैकिवोख़ुदतोहैनएघरमें
औरउसकीयादपुरानेमकाँमेंरहतीहै
पतातोफ़स्ल-ए-गुल-ओ-लालाकानहींमालूम
सुनाहैक़ुर्ब-ओ-जवार-ए-ख़िज़ाँमेंरहतीहै
मैंकितनावहमकरूँँलेकिनइकशुआ-ए-यक़ीं
कहींनवाह-ए-दिल-ए-बद-गुमाँमेंरहतीहै
हज़ारजानखपातारहूँमगरफिरभी
कमीसीकुछमिरेतर्ज़-ए-बयाँमेंरहतीहै
  - Ahmad Mushtaq
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