ajab nahin kabhi naghma bane fugaan mirii | अजब नहीं कभी नग़्मा बने फ़ुग़ाँ मेरी

  - Ahmad Mushtaq
अजबनहींकभीनग़्माबनेफ़ुग़ाँमेरी
मिरीबहारमेंशामिलहैअबख़िज़ाँमेरी
मैंअपने-आपकोऔरोंमेंरखकेदेखताहूँ
कहींफ़रेबहोंदर्द-मंदियाँमेरी
मैंअपनीक़ुव्वत-ए-इज़हारकीतलाशमेंहूँ
वोशौक़हैकिसँभलतीनहींज़बाँमेरी
यहीसबबहैकिअहवाल-ए-दिलनहींकहता
कहूँतोऔरउलझतीहैंगुत्थियाँमेरी
मैंअपनेइज्ज़पेनादिमनहींहूँहम-सुख़नो
हज़ार-शुक्रतबीअ'तनहींरवाँमेरी
  - Ahmad Mushtaq
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