ghamon ki dhoop men uf mahtaab se chehre | ग़मों की धूप में उफ़ माहताब से चेहरे

  - Ahmad Merathi
ग़मोंकीधूपमेंउफ़माहताबसेचेहरे
झुलसकेरहगएक्याक्यागुलाबसेचेहरे
लिखीहुईनज़रआईंहिकायतेंक्याक्या
पढ़ेजोग़ौरसेहमनेकिताबसेचेहरे
मता-ए-नूरमसाइबनेलूटलीशायद
दिखाईदेतेहैंबे-आब-ओ-ताबसेचेहरे
येसोचताहूँकिसेमो'तबरकहाजाए
नज़रमेंजितनेहैंसबहैंसराबसेचेहरे
जोइंक़िलाब-ए-ज़मानासेहोगएरू-पोश
ख़यालमेंहैंवहीला-जवाबसेचेहरे
गिराहैजबभीसिताराकोईबुलंदीसे
उभरकेज़ेहनपेआएशहाबसेचेहरे
नज़रकेसामनेरहतेथेजोकभी'अहमद'
वहीतोरहगएसबहोकेख़्वाबसेचेहरे
  - Ahmad Merathi
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