tu ziyaada men se baahar nahin aaya karta | तू ज़ियादा में से बाहर नहीं आया करता

  - Ahmad Kamran
तूज़ियादामेंसेबाहरनहींआयाकरता
मैंज़ियादाकोमुयस्सरनहींआयाकरता
मैंतिरावक़्तहूँऔररूठकेजानेलगाहूँ
रोकलेयारमैंजाकरनहींआयाकरता
पलटआनेकीख़्वाहिशयेज़राध्यानमेंरख
जंगसेकोईबराबरनहींआयाकरता
चंदपेड़ोंकोहीमजनूँकीदु'आहोतीहै
सबदरख़्तोंपेतोपत्थरनहींआयाकरता
अबमुजाविरभीक़लंदरसेबड़ेहोगएहैं
अबमज़ारोंपेकबूतरनहींआयाकरता
  - Ahmad Kamran
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