tamaam bheed se aage nikal ke dekhte hain | तमाम भीड़ से आगे निकल के देखते हैं

  - Ahmad Kamal Parvazi
तमामभीड़सेआगेनिकलकेदेखतेहैं
तमाश-बीनवोचेहराउछलकेदेखतेहैं
नज़ाकतोंकायेआलमकिरू-नुमाईकीरस्म
गुलाबबाग़सेबाहरनिकलकेदेखतेहैं
तूला-जवाबहैसबइत्तिफ़ाक़रखतेहैं
मगरयेशहरकेफ़ानूसजलकेदेखतेहैं
इसेमैंअपनेशबिस्ताँमेंछूकेदेखताहूँ
वोचाँदजिसकोसमुंदरउछलकेदेखतेहैं
जोखोगयाहैकहींज़िंदगीकेमेलेमें
कभीकभीउसेआँसूनिकलकेदेखतेहैं
जोरोज़दामन-ए-सद-चाकसीतेरहतेहैं
तुम्हेंवोईदपेकपड़ेबदलकेदेखतेहैं
  - Ahmad Kamal Parvazi
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