rog aise bhi gham-e-yaar se lag jaate hain | रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं

  - Ahmad Faraz
रोगऐसेभीग़म-ए-यारसेलगजातेहैं
दरसेउठतेहैंतोदीवारसेलगजातेहैं
इश्क़आग़ाज़मेंहल्कीसीख़लिशरखताहै
बादमेंसैकड़ोंआज़ारसेलगजातेहैं
पहलेपहलेहवसइक-आधदुकाँखोलतीहै
फिरतोबाज़ारकेबाज़ारसेलगजातेहैं
बेबसीभीकभीक़ुर्बतकासबबबनतीहै
रोपाएँतोगलेयारसेलगजातेहैं
कतरनेंग़मकीजोगलियोंमेंउड़ीफिरतीहैं
घरमेंलेआओतोअम्बारसेलगजातेहैं
दाग़दामनकेहोंदिलकेहोंकिचेहरेके'फ़राज़'
कुछनिशाँउम्रकीरफ़्तारसेलगजातेहैं
  - Ahmad Faraz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy