हम तो ख़ुश थे कि चलो दिल का जुनूँ कुछ कम है

  - Ahmad Faraz
हमतोख़ुशथेकिचलोदिलकाजुनूँकुछकमहै
अबजोआरामबहुतहैतोसुकूँकुछकमहै
रंग-ए-गिर्यानेदिखाईनहींअगलीसीबहार
अबकेलगताहैकिआमेज़िश-ए-ख़ूँकुछकमहै
अबतेराहिज्रमुसलसलहैतोयेभेदखुला
ग़म-ए-दिलसेग़म-ए-दुनियाकाफ़ुसूँकुछकमहै
उसनेदुखसारेज़मानेकामुझेबख़्शदिया
फिरभीलालचकातक़ाज़ाहैकहूँकुछकमहै
राह-ए-दुनियासेनहींदिलकीगुज़रगाहसे
फ़ासलागरचेज़ियादाहैयूँँकुछकमहै
तूनेदेखाहीनहींमुझकोभलेवक़्तोंमें
येख़राबीकिमैंजिसहालमेंहूँकुछकमहै
आगहीआगमेरेक़र्या-ए-तनमेंहै'फ़राज़'
फिरभीलगताहैअभीसोज़-ए-दरूँकुछकमहै
  - Ahmad Faraz
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