yahaañ pe dhunde se bhi farishte nahin milenge | यहाँ पे ढूँडे से भी फ़रिश्ते नहीं मिलेंगे

  - Ahmad Azeem
यहाँपेढूँडेसेभीफ़रिश्तेनहींमिलेंगे
ज़मींहैसाहबयहाँतोअहल-ए-ज़मींमिलेंगे
परेशाँमतहोकियारटेढ़ीलकीरेंहैंहम
कहाँकातोकुछपतानहींपरकहींमिलेंगे
कुछऐसेग़महैंजोदिलमेंहरगिज़नहींठहरते
मकानहोतेहुएसड़कपरमकींमिलेंगे
ज़मींपेमिलनेदेंगेहमकोज़मानेवाले
चलोकिमरतेहैंदोनोंज़ेर-ए-ज़मींमिलेंगे
हमारेदिलमेंबनीहुईहैंहज़ारोंक़ब्रें
हरएकतुर्बतमेंदफ़्नज़िंदायक़ींमिलेंगे
रखागयाहैहमेंकुछऐसेमुग़ालतेमें
वहाँमिलेंगेजहाँपेअर्श-ओ-ज़मींमिलेंगे
हमेंतोहूरेंमिलेंगीहमसेबनाकेरक्खो
तुम्हेंवहाँपरभीजाकेकेवलहमींमिलेंगे
  - Ahmad Azeem
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