ab kisi KHvaab ki taabeer nahin chahta main | अब किसी ख़्वाब की ता'बीर नहीं चाहता मैं

  - Ahmad Ashfaq
अबकिसीख़्वाबकीता'बीरनहींचाहतामैं
कोईसूरतपस-ए-तस्वीरनहींचाहतामैं
चाहताहूँकिरिफ़ाक़तकाभरमरहजाए
अहद-ओ-पैमानकीतफ़्सीरनहींचाहतामें
हुक्मसादिरहैतोनाफ़िज़भीकरोमेरेहुज़ूर
फ़ैसलेमेंकोईताख़ीरनहींचाहतामैं
चाहताहूँतुझेगुफ़्तारसेक़ाइलकरलूँ
बातमेंलहजा-ए-शमशीरनहींचाहतामैं
मुद्दआहैकिमिराहक़मुझेवापसमिलजाए
तेरेअज्दादकीजागीरनहींचाहतामैं
  - Ahmad Ashfaq
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