vo rangat tu ne ai gul-roo nikaali | वो रंगत तू ने ऐ गुल-रू निकाली

  - Agha Hajju Sharaf
वोरंगततूनेगुल-रूनिकाली
निछावरकोगुलोंनेबूनिकाली
मिज़ाज-ए-बू-ए-सुम्बुलकरकेमौक़ूफ़
सबानयनिकहत-ए-गेसूनिकाली
थीजानेकीउसतकराहदिलकी
छुरीसेचीरकेपहलूनिकाली
निकासीजबदेखीयासदिलकी
बहाकेआठआठआँसूनिकाली
हमारीरूहइकरश्क-ए-चमनने
सुँघाकेफूलकीख़ुशबूनिकाली
मिरेसय्यादनेबुलबुलकीमय्यत
क़फ़ससेतोड़केबाज़ूनिकाली
कियाउससेजोख़ुश-चश्मीकादावा
तिरीजाएगीआँखआहूनिकाली
सुलैमानीदिखादीशानतुमने
परी-रूमाँगवोख़ुश-रूनिकाली
निकालाहुस्नकाअरमानतूने
मिरीहसरतदिल-जूनिकाली
चमनमेंभीनीभीनीबूनेउनकी
बसनेदीगईशब्बूनिकाली
दहान-ए-ज़ख़्मसेतलवारचूमी
ब-शक्ल-ए-बोसा-ए-अब्रूनिकाली
क़यामतकाशबाबउसनेनिकाला
'शरफ़'चंगेज़-ख़ानीख़ूनिकाली
  - Agha Hajju Sharaf
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy