talash-e-qabr men yuñ ghar se ham nikal ke chale | तलाश-ए-क़ब्र में यूँँ घर से हम निकल के चले

  - Agha Hajju Sharaf
तलाश-ए-क़ब्रमेंयूँँघरसेहमनिकलकेचले
कफ़नबग़लमेंलियामुँहपेख़ाकमलकेचले
हवाखिलानीथीदुनियाकीमेरीमय्यतको
उठानेवालेजोकांधाबदलबदलकेचले
जगहदीहमेंउसशम्अ'-रूनेपहलूमें
हवसबुझानेकोआएथेऔरजलकेचले
उठाकेबज़्मसेहमलेचलेजोख़ल्वतमें
क़दमक़दमपेवोरूठेमचलमचलकेचले
यहाँतकआएहैंतयहमदो-मंज़िलाकरके
तुम्हारीबज़्ममेंपहुँचेहैंआज-कलकेचले
शहीद-ए-नाज़कीमय्यतजोदेखीगुल-दर-गुल
कफ़नखसूटजोआएथेहाथमलकेचले
कमंद-ए-काकुल-ए-पेचाँसेदूरदूररहे
क़ज़ाटलेजो'शरफ़'उसबलासेटलकेचल
  - Agha Hajju Sharaf
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