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Afzal Sultanpuri
hai dil-e-be-qaraar muddat se
hai dil-e-be-qaraar muddat se | है दिल-ए-बे-क़रार मुद्दत से
- Afzal Sultanpuri
है
दिल-ए-बे-क़रार
मुद्दत
से
कर
रहे
इंतिज़ार
मुद्दत
से
- Afzal Sultanpuri
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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ये
कैसा
नश्शा
है
मैं
किस
अजब
ख़ुमार
में
हूँ
तू
आ
के
जा
भी
चुका
है
मैं
इंतिज़ार
में
हूँ
Muneer Niyazi
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माना
कि
तेरी
दीद
के
क़ाबिल
नहीं
हूँ
मैं
तू
मेरा
शौक़
देख
मिरा
इंतिज़ार
देख
Allama Iqbal
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सब
इंतज़ार
में
थे
कब
कोई
ज़बान
खुले
फिर
उसके
होंठ
खुले
और
सबके
कान
खुले
Umair Najmi
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रात
का
इंतिज़ार
कौन
करे
आज
कल
दिन
में
क्या
नहीं
होता
Bashir Badr
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बे-ख़ुदी
ले
गई
कहाँ
हम
को
देर
से
इंतिज़ार
है
अपना
Meer Taqi Meer
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कभी
तो
चौंक
के
देखे
कोई
हमारी
तरफ़
किसी
की
आँख
में
हम
को
भी
इंतिज़ार
दिखे
Gulzar
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जो
चराग़
सारे
बुझा
चुके
उन्हें
इंतिज़ार
कहाँ
रहा
ये
सुकूँ
का
दौर-ए-शदीद
है
कोई
बे-क़रार
कहाँ
रहा
Ada Jafarey
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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ये
इंतिज़ार
सहर
का
था
या
तुम्हारा
था
दिया
जलाया
भी
मैं
ने
दिया
बुझाया
भी
Aanis Moin
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अमीरों
ने
हमारे
शहर
में
मस्जिद
बनाई
है
गरीबों
ने
किए
सजदे
अरे
क्या
बे
हयाई
है
Afzal Sultanpuri
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इक
ज़रूरी
सा
काम
है
मुझ
पर
आपका
एहतिराम
है
मुझ
पर
ख़ून
की
उल्टियाँ
नहीं
होती
मौत
भी
तो
हराम
है
मुझ
पर
इश्क़
की
हद
तुम्हें
बताता
हूँ
इश्क़
का
इख़्तिताम
है
मुझ
पर
ऐसे
जीना
है
मौत
हो
जैसे
ये
भी
क़िस्सा
तमाम
है
मुझ
पर
मेरी
पहचान
है
फ़क़त
इतनी
एक
घटिया
कलाम
है
मुझ
पर
मेरा
सब
नाम
ले
रहे
'अफ़ज़ल'
कितना
गन्दा
सा
नाम
है
मुझ
पर
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Afzal Sultanpuri
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हमारे
ख़्वाब
की
ता'बीर
क्या
है
क़लम
हूँ
जानता
शमशीर
क्या
है
मसाइल
से
ज़रूरी
है
निपटना
बताओ
अब
हमें
तदबीर
क्या
है
मिलाया
ज़हर
खाने
में
हमारे
ज़रा
चखकर
बता
तासीर
क्या
है
कि
हमने
तोड़
दी
बंदिश
जहाँ
की
भला
ये
चीज़
भी
ज़ंजीर
क्या
है
मुझे
बैठा
दिया
है
सामने
जब
ज़रूरत
अब
उसे
तस्वीर
क्या
है
इशारा
ही
बहुत
है
जान
'अफ़ज़ल'
निकाह
ए
यार
में
ताख़ीर
क्या
है
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Afzal Sultanpuri
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मुसलमाँ
अब
हुए
हैं
सब
हजारों
साल
काफ़िर
थे
मिली
दुनिया
सज़ा
में
ही
सफ़र
के
हम
मुसाफ़िर
थे
Afzal Sultanpuri
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बे-वफ़ाई
तुम्हें
मुबारक
हो
किबरियाई
तुम्हें
मुबारक
हो
Afzal Sultanpuri
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