तुम्हारेप्यारकेक़ाबिलनहींहूँ
किनाराहूँमगरसाहिलनहींहूँ
उठासकताथामैंतलवारलेकिन
ज़मानेकीतरहज़ाहिलनहींहूँ
क़बाइलजलगयामैंभागआया
मगरअएयारमैंबुज़दिलनहींहूँ
जनाज़ेकीक़समसचकहरहाहूँ
नहींइसजुर्ममेंशामिलनहींहूँ
मुझेबदनामकरनेमेंलगेहैं
मैंअपनेयारकाक़ातिलनहींहूँ
मुझेअबछोड़करअफ़ज़लचलाजा
सफ़रकामैंतिरेमंज़िलनहींहूँ