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Afzal Sultanpuri
hijr ko aasaan karne men lagii ho
hijr ko aasaan karne men lagii ho | हिज्र को आसान करने में लगी हो
- Afzal Sultanpuri
हिज्र
को
आसान
करने
में
लगी
हो
इक
बड़ा
नुक़सान
करने
में
लगी
हो
ठीक
हूँ
मैं
या
नहीं
हूँ
तेरी
ख़ातिर
तुम
यही
पहचान
करने
में
लगी
हो
है
बहुत
उम्दा
मगर
अफ़ज़ल
नहीं
वो
तुम
जिसे
सुलतान
करने
में
लगी
हो
जा
रहे
हम
दैर
से
अल्लाह
हाफ़िज़
आप
तो
यकसान
करने
में
लगी
हो
- Afzal Sultanpuri
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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हम
ऐसे
सुनते
हैं
उसकी
बातों
को
जैसे
कोई
सूफ़ी
गाने
सुनता
है
Tanoj Dadhich
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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तेरा
रुख़-ए-मुख़त्तत
क़ुरआन
है
हमारा
बोसा
भी
लें
तो
क्या
है
ईमान
है
हमारा
Meer Taqi Meer
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पहले
पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगी
ने
यही
सिखाया
है
धूप
में
छाँव
काम
आया
है
आरज़ू
ख़त्म
हो
गई
मेरी
फोन
पर
कौन
हो
बुलाया
है
थी
तमन्ना
गले
लगा
लो
तुम
और
फिर
मौत
ने
लगाया
है
क्या
यही
प्यार
की
हक़ीक़त
है
प्यार
को
यार
किसने
पाया
है
और
भी
दोस्त
हैं
हमारे
पर
तुमको
अपना
सनम
बनाया
है
इस
ग़ज़ल
को
तुम्हारी
हाजत
है
इसने
तो
नूर
तुम
सेे
पाया
है
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Afzal Sultanpuri
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दिल
चोरी
का
काम
ग़लत
है
'अफ़ज़ल'
तेरा
नाम
ग़लत
है
इश्क़,
मोहब्बत
तुम
रहने
दो
इसका
तो
अंजाम
ग़लत
है
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Afzal Sultanpuri
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छोड़कर
तुम
भी
मुझे
रमज़ान
में
यूँँ
जा
रहे
अब
मुझे
ये
लग
रहा
जैसे
जुमा
हो
अलविदा
Afzal Sultanpuri
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यही
दुख
हमको
खाए
जा
रहा
है
वो
हमको
बिन
बताए
जा
रहा
है
मगर
उसने
ज़रा
भी
ये
न
सोचा
वो
हम
पर
ज़ुल्म
ढाए
जा
रहा
है
हम
उसको
याद
करने
में
लगे
हैं
वो
हमको
ही
भुलाए
जा
रहा
है
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Afzal Sultanpuri
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ज़रा
मेरा
अक़ीदा
मुख्तलिफ़
है
तभी
तुम
दूर
हम
सेे
जा
रहे
हो
Afzal Sultanpuri
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