agar badla kabhi rukh be-rukhi ka | अगर बदला कभी रुख़ बे-रुख़ी का

  - Afzal Peshawari
अगरबदलाकभीरुख़बे-रुख़ीका
तोआएगामज़ाकुछज़िंदगीका
मुझेबर्बादकरकेहँसरहेहो
लियाहैतुमनेयेबदलाकभीका
इसीउम्मीदपरग़मसहरहाहूँ
कभीतोआएगामौक़ा'ख़ुशीका
मुझेदिलसेभुलानाचाहतेहो
यहीहैमुद्दआ'दामन-कुशीका
मोहब्बतमेंगईइज़्ज़ततोक्याग़म
यहाँयेहश्रहोताहैसभीका
कभीहोगाशगुफ़्तादिलकाग़ुंचा
कभीबदलेगारंगअफ़्सुर्दगीका
मुझे'अफ़ज़ल'डुबोयाहैउसीने
जिसेसमझेसहाराज़िंदगीका
  - Afzal Peshawari
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