आजहीफ़ुर्सतसेकलकामसअलाछेड़ूँगामैं
मसअलाहलहोतोहलकामसअलाछेड़ूँगामैं
वस्लओहिज्राँमेंतनासुबरास्तहोनाचाहिएइश्क़केरद्द-ए-अमलकामसअलाछेड़ूँगामैं
देखनासबलोगमुझकोख़ारिजीठहराएँगे
कलयहाँजंग-ए-जमलकामसअलाछेड़ूँगामैं
कश्तियोंवालेमुझेतावानदेकरपारजाएँ
वर्नालहरोंमेंख़ललकामसअलाछेड़ूँगामैं
मिलहीजाएँगेकहींतोमुझको'बेदिल-हैदरी'
कूज़ा-गरवालीग़ज़लकामसअलाछेड़ूँगामैं
इसशजरकीएकटहनीपरलेआँगनमेंभीहै
अपनेहम-साएसेफलकामसअलाछेड़ूँगामैं