aaj hi furqat se kal ka mas'ala chhedoonga main | आज ही फ़ुर्सत से कल का मसअला छेड़ूँगा मैं

  - Afzal Khan
आजहीफ़ुर्सतसेकलकामसअलाछेड़ूँगामैं
मसअलाहलहोतोहलकामसअलाछेड़ूँगामैं
वस्लहिज्राँमेंतनासुबरास्तहोनाचाहिएइश्क़केरद्द-ए-अमलकामसअलाछेड़ूँगामैं
देखनासबलोगमुझकोख़ारिजीठहराएँगे
कलयहाँजंग-ए-जमलकामसअलाछेड़ूँगामैं
कश्तियोंवालेमुझेतावानदेकरपारजाएँ
वर्नालहरोंमेंख़ललकामसअलाछेड़ूँगामैं
मिलहीजाएँगेकहींतोमुझको'बेदिल-हैदरी'
कूज़ा-गरवालीग़ज़लकामसअलाछेड़ूँगामैं
इसशजरकीएकटहनीपरलेआँगनमेंभीहै
अपनेहम-साएसेफलकामसअलाछेड़ूँगामैं
  - Afzal Khan
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