misaal-e-barg kisi shaakh se jhade hue hain | मिसाल-ए-बर्ग किसी शाख़ से झड़े हुए हैं

  - Afzal Gauhar Rao
मिसाल-ए-बर्गकिसीशाख़सेझड़ेहुएहैं
इसीलिएतोतिरेपाँवमेंपड़ेहुएहैं
ज़मींनेऊँचाउठायाहुआहैवर्नादोस्त
हवामेंघासकेतिनकेकहाँपड़ेहुएहैं
किसीनेमेरीज़मींछानकरनहींदेखी
वगर्नाकितनेसितारेयहाँपड़ेहुएहैं
यहाँसरोंपेयूँँहीबर्फ़पड़ीवर्ना
बड़ेभीउम्रसेअपनीकहाँबड़ेहुएहैं
किसीकेहुक्मसेऐसाजुमूदतारीहै
ज़मींरवानाहुईऔरहमखड़ेहुएहैं
  - Afzal Gauhar Rao
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